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राजभवन के राज्यपाल ने फिर विवाद को दी हवा

Byadmin

Feb 2, 2022

राजस्थान के राज्यपाल का विवाद इस बार मामला हरदेव जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय विश्वविद्यालय (Haridev Joshi University of Journalism and Mass Communication) से जुड़ा है। जिसे सूबे की गहलोत सरकार (Rajasthan Highcourt) ने अपने पिछले कार्यकाल में शुरू तो किया था लेकिन वसुंधरा सरकार ने विवि में छात्रों की कमी का हवाला देते हुए राजस्थान विश्वविद्यालय के जनसंचार केंद्र में विलय कर दिया। राज्य में गहलोत सरकार आने के बाद साल 2019 में फिर से एक बिल पास करके हरिदेव जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय को स्थापित किया गया। लेकिन अब फिर से बीजेपी नेता विश्व विद्यालय के कुलपति और इसमें होने वाली भर्तियों के आड़े आने लगे हैं। खास बात यह है कि इस मामले में राज्यपाल कलराज मिश्र की भी गहरी दिलचस्पी दिखाई दे रही है।

 

 

अभी कुछ ही दिन पहले गहलोत सरकार द्वारा नियुक्त किये गए, विश्वविद्यालय के कुलपति पत्रकार ओम थानवी (vice chancellor om thanvi)  की योग्यता को भी बीजेपी के कुछ नेताओं ने हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए उन्हें अयोग्य ठहराया था। हाईकोर्ट में याचिका लगाने वाले पंकज प्रताप सिंह ने कहा था कि यूजीसी के नियमों के मुताबिक विश्वविद्यालय के कुलपति के तौर पर ओम थानवी योग्य नहीं है। इस पर थानवी को ओर से जवाब दिया गया कि उनकी नियुक्ति विश्वविद्यालय एक्ट के प्रावधान 11(17) में स्पष्ट नियमों के मुताबिक ही हुई है जिनके तहत प्रथम कुलपति की नियुक्ति सरकार से परामर्श के बाद चांसलर द्वारा निर्धारित नियम व शर्तों के आधार पर की जाती है।

 

 

वहीं, अब विवि में हो रही भर्तियों को लेकर राज्यपाल की ओर से बड़ा फैसला लेते हुए विवि में हो रही भर्तियों पर रोक लगाने के आदेश दिए गए हैं. पत्रकारिता विवि में निकाली गई 24 पदों पर भर्ती को राजभवन की ओर से स्थगित कर दिया गया है. राजभवन की ओर से ये आदेश भाजपा विधायक वासुदेव देवनानी द्वारा दी गई लिखित शिकायत पर दिया गया. देवनानी का आरोप है कि पत्रकारिता विवि के कुलपति ओम थानवी सेवानिवृत्ति से पहले धांधलीबाजी करते हुए इस भर्ती को पूरा करने जा रहे थे. जबकि यूजीसी योग्यता मापदंडों की पालना नहीं थी और साथ ही कई और गड़बड़ियां की थी. राज्यपाल ने अपने निर्देश में देवनानी के पत्र का जिक्र करते हुए सेवानिवृत्त होने जा रहे कुलपति द्वारा शिक्षकों की नियुक्तियों के संबंध में भर्ती प्रक्रिया को स्थगित करने को कहा है.

मामले पर विश्‍वविद्यालय के कुलपति ओम थानवी का कहना है कि यह नियुक्तियां तीन महीने पहले निकाली गई थीं और उन्हें मार्च में रिटायर होना है। हालांकि थानवी ने राजभवन के इस फैसले पर आपत्ति जताते हुए नैतिकता के आधार पर नियुक्तियां रोक दी हैं। लेकिन उन्होंने बीजेपी की मंशाओं पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाए हैं कि दो भाजपा नेता अचानक सक्रिय होकर बिना सिर पैर की बातें कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो बातें बीजेपी नेताओं को तीन वर्ष में नहीं सूझीं, उन्हें अब कल्पना के सहारे उछाल रहे हैं। उन्हें कौन शह दे रहा है और क्यों, यह मैं वक़्त आने पर बताऊंगा। आपको बता दें कि इससे पहले भी राज्यपाल कलराज मिश्र ने बीजेपी की शिकायत पर अजमेर की MDS यूनिवर्सिटी के कार्यवाहक कुलपति ओम थानवी को हटाने के आदेश हुए जारी किये थे। इसके पीछे वजह बताई जा रही है कि पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति ओम थानवी पीएम मोदी के घोर विरोधी हैं और अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मोदी सरकार लगातार हमला भी बोलते रहते हैं। इसके अलावा वह सीएम गहलोत के भी करीब बताए जाते हैं।

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